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1. संगठित पूंजी बाजार(FORMAL OR ORGANISED CAPITAL MARKET)- संगठित पूंजी बाजार के अंतर्गत वित्त संबंधी कार्य पंजीबद्ध विभिन्न वित्तीय संस्थाएं करती हैं, जो विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्रों से निजी वस्तुओं को एकत्र कर दीर्घकालीन पूंजी की व्यवस्था करती है जैसे-

भारतीय यूनिट ट्रस्ट (UTI), जीवन बीमा निगम (LIC), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक(SIDBI), वाणिज्य बैंक, उद्योग वित्त निगम (IFC), भारतीय उद्योग साख एवं विनियोग निगम (ICICI, भारतीय उद्योग विकास बैंक (IDBI), राष्ट्रीय औद्योगिक विकास निगम (NIDC), भारतीय औद्योगिक पुनर्निर्माण बैंक (IRBI), सामान्य बीमा निगम (GIC), राज्य वित्तीय संस्थाएं (SFCs), आवासीय वित बैंक (RFB) आदि प्रमुख है‌। इन सभी का नियंत्रण भारतीय विनियम बोर्ड (SEBI) द्वारा किया जाता है।

2. असंगठित या गैर संगठित बाजार (INTERNAL OR UNORGANISED MARKET)- इसे अनौपचारिक बाजार भी कहा जाता है, इसमें देसी बैंकर्स, साहूकार, महाजन आदि प्रमुख होते हैं। काले धन का बहुत बड़ा भाग गए असंगठित क्षेत्र में वित्त व्यवस्था करता है। यह उद्योग व्यापार तथा कृषि क्षेत्रों में पूंजी का विनियोजन करते हैं। इनकी ब्याज दरें और वित्तीय नीति कभी भी एक समान नहीं होती है। जिसके परिणाम स्वरुप यह साहूकार कभी-कभी ऊंची दर पर ऋण देकर अधिक लाभ कमाने का प्रयास करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक इन पर नियंत्रण करने के लिए प्रयास करता है।

प्राथमिक पूंजी बाजार क्या है

prathmik punji bajar kya hai;प्राथमिक पूंजी बाजार का आशय उस बाजार से है, जिसमें नए ब्रांड का निर्माण किया जाता है, इसे नवीन निर्गम बाजार भी कहा जाता है। जिस बाजार में कंपनियों द्वारा प्रथम बार कोई नई चीज बेची जाती है, उसे प्राथमिक बाजार कहा जाता है।

प्राथमिक पूंजी बाजार की पांच विशेषताएं | prathmik punji bajar ki panch vhishestayen

1. प्राथमिक बाजार में नवीन प्रतिभूतियों के व्यवहार का निर्गम होता है।

2. कीमत का निर्धारण- प्रतिभूतियों की कीमत कंपनी के प्रबंधकों द्वारा निर्धारित की जाती है।

3. प्रत्यक्ष निर्माण- प्राथमिक बाजार में कंपनी सीधे बिचौलियों के माध्यम से नियोजकों को प्रतिभूतियों का निर्गम कराती है।

4. स्थान- प्राथमिक बाजार के लिए कोई विशेष स्थान नहीं होता है।

5. पूंजी निर्माण- प्राथमिक बाजार प्रत्यक्ष रूप से पूंजी निर्माण में वृद्धि करता है, और उससे नए यंत्र, मशीनरी भवन आदि के लिए उनका उपयोग करते हैं।

पूंजी बाजार के महत्व | punji bajar ke mahatv

1. पूंजी बाजार पूंजी निवेशकों और बचत करने वालों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

2. अपनी समस्त आय खर्च ना करने वाले बचत कर्ताओं के लिए सरल साधन पूंजी बाजार होता है।

3. आम जनता की छोटी-छोटी बचतों के लिए पूंजी बाजार एक अच्छा व लाभकारी क्षेत्र प्रदान करता है।

4. इस प्रकार कम दर पर अधिक समय के लिए पूंजी प्राप्त करने का एक अच्छा मार्ग पूंजी बाजार होता है।

5. पूंजी बाजार में मांग व पूर्ति के मध्य संतुलन बनाए रखने का कार्य पूंजी बाजार अपने उपकरणों के माध्यम से करता है।

पूंजी बाजार की विशेषता | punji bajar ki vhishestayen

1. पूंजी बाजार निगमों और सरकारी ब्रांड प्रतिभूतियों आदि में लेन-देन करता है।

2. पूंजी बाजार में कार्य करने वाले व्यक्ति, व्यापारिक बैंक, वाणिज्य बैंक, बीमा कंपनियां और औद्योगिक बैंक, औद्योगिक वित्त निगम, यूनिट ट्रस्ट, निवेश ट्रस्ट, भवन समिति आदि प्रमुख होते हैं।

3. पूंजी बाजार में नई एवं पुराने सभी प्रकार की प्रतिभूतियों का क्रय विक्रय होता है।

शेयर बाजार में कभी न करें ये गलतियां, डूब जाएगी मेहनत की कमाई; जान लें एक्‍सपर्ट के खास सुझाव

Stock Market trading tips: शेयर बाजार में अगर सही तरीके से निवेश किया जाए, तो इससे अच्‍छा मुनाफा कमाया जा सकता है. लेकिन, अगर आपका अप्रोच गलत रहता है, तो यह बाजार आपको तगड़ा झटका भी दे सकता है.

Stock Market trading tips: शेयर बाजार में अगर सही तरीके से निवेश किया जाए, तो इससे अच्‍छा मुनाफा कमाया जा सकता है. लेकिन, अगर आपका अप्रोच गलत रहता है, तो यह बाजार आपको तगड़ा झटका भी दे सकता है. स्टॉक मार्केट में अपने निवेश पर ज्‍यादा से ज्‍यादा रिटर्न के लिए हमें उन गलतियों से बचना होगाा, जो आपकी वेल्‍थ वित्तीय बाज़ार क्या हैं को नुकसान पहुंचा सकते हैं. साथ ही आपके जीवन के महत्‍वपूर्ण फाइनेंशियल गोल को प्रभावित कर सकते हैं. एडलवाइज वेल्‍थ मैनेजमेंट के प्रेसिडेंट एंड हेड (पर्सनल वेल्‍थ) राहुल जैन ने बाजार में उन गलतियों से बचने की सलाह दी है, जो अक्‍सर निवेशक करते हैं. उनका कहना है कि बाजार से वेल्‍थ बनाना है, तो एंट्री से पहले जरूरी होमवर्क करना जरूरी है. साथ ही बाजार में हमेशा धैर्य बनाए रखना चाहिए.

बाजारों के बारे में कभी अनुमान न लगाएं

राहुल जैन कहते हैं, शेयर बाजार अस्थिर और रहस्यमय हैं. यहां तक कि सबसे अनुभवी निवेशक भी यह अनुमान नहीं लगा सकते हैं कि भविष्य में बाजार किस दिशा में जाएगा. बाजारों की भविष्यवाणी करने का प्रयास करना सही नहीं है और इसके अच्‍छे नतीजे नहीं मिलते हैं. बाजार में टाइमिंग को समझना काफी मुश्किल है. इसके चलते असकर गलत फैसले हो जाते हैं.

इसलिए, भविष्यवाणी करने के बजाय बाजारों में लंबी अवधि का नज‍रिया रखना सबसे अच्‍छा तरीका है. बाजार से उन लोगों को अच्‍छा खासा मुनाफा हुआ है, जो इसके मूवमेंट का अनुमान लगाने के बजाय इसमें लंबी अवधि तक बने रहे.

पर्याप्त होमवर्क नहीं करना

बिना पर्याप्‍त होमवर्क के शेयर बाजारों में एंट्री नहीं करनी चाहिए. आपको अपना होमवर्क कई स्तरों पर करना चाहिए. बाजार की सामान्य शब्दावली जानने से लेकर स्टॉक चुनने तक के बारे में आपको उचित होमवर्क करना होगा. आज के समय में इंटरनेट पर पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है, जो आपको ट्रेड के कॉन्‍सेप्‍ट्स और ट्रिक्‍स को सीखने में मदद करती है. सबसे अहम बात, धैर्य रखें और संदेह होने पर प्रोफेशनल की मदद लें.

अनुशासन की कमी

बाजार में अनुशासन रखना जरूरी है. अनुशासन की कमी हर जगह आपको नुकसान पहुंचा सकती है. शेयर बाजार में निवेश भी अलग नहीं है. अपने लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखे बिना निवेश करना आपको कहीं नहीं ले जा सकता है. बाजार में उतार-चढ़ाव आने पर जल्‍दबाजी में शेयर खरीदना या बेचना सही नहीं होता है.

भीड़ को फॉलो करना

शेयर बाजारों में, किसी खास स्टॉक का पीछा करने वाले लोगों की भीड़ अमूमन दिखाई देती है. इस तरह के झुंड का आंख बंद करके पीछा करना आगे चलकर नुकसान पहुंचा सकता है. किसी स्टॉक में निवेश करने से पहले, उसके फंडामेंट्ल्‍स को समझें, कंपनी के ग्रोथ आउटलुक का मूल्यांकन करें, उसकी वित्तीय स्थिति देखें और प्रबंधन के ट्रैक रिकॉर्ड का विश्लेषण करें. सबसे अहम बात यह सुनिश्चित करें कि निवेश आपके लक्ष्य के अनुरूप हो. जब ये सभी चीजें आप समझ लें, तब ही निवेश के लिए कदम बढ़ाएं.

डायवर्सिफिकेशन न करना

राहुल जैन का कहना है, डायवर्सिफिकेशन निवेश के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है. पर्याप्त डायवर्सिफिकेशन आपके पोर्टफोलियो में स्थिरता आती है. डायवर्सिफिकेशन से मंदी के दौरान आपका मुनाफा खत्‍म होने से बचाने में मदद मिलती है. बाजार हरेक सेक्‍टर को अलग तरह से प्रभावित करते हैं और डायवर्सिफिकेशन वॉलेटाइल मार्केट में अपकी लैंडिंग को आसान बनाता है.

बाजार में यह जानना मुश्किल हो सकता है कि निवेश करने का सही समय कब है. स्टॉक की कीमतों की आकलन करना भी मुश्किल है. बहुत से लोग बाजार को समय देने की कोशिश करते हैं, लेकिन कुछ निश्चित वजहों से ऐसा नहीं कर पाते हैं. वहीं, ऐसे कई स्टॉक होते हैं, जिनमें लगता है कि अच्‍छी कमाई होगी और इसी उम्‍मीद में निवेशक अपना पूरा पैसा गंवा बैठते हैं. निवेशक के रूप में, हम सभी गलतियाँ करते हैं. जरूरी यह है कि हमें उनसे सीखना है और उन्हें दोहराना नहीं है.

पूँजी बाजार (Capital market)

पूंजी बाजार क्या है, पूंजी बाजार से क्या आशय है, पूंजी बाजार का अर्थ, पूंजी बाजार के प्रकार आदि प्रश्नों के उत्तर यहाँ दिए गए हैं। पूँजी बाजार (Capital market) notes in Hindi for UPSC and PCS.

Table of Contents

पूँजी बाजार

पूंजी बाजार वह बाजार है जहां पर अंश पूँजी (Share) एवं प्रतिभूतियों (Securities) का लेन-देन किया जाता है। पूंजी बाजार का नियंत्रण सेबी (SEBI-Securities and Exchange Board Of India) करता है। SEBI की स्थापना 12 अप्रैल,1988 में हुई थी, इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। सेबी की स्थापना के वर्ष (1988) इसकी प्रारंभिक पूंजी 7.5 करोड़ थी जो कि प्रवर्तक कंपनियों (IDBI, ICICI, IFCI) द्वारा प्रदान की गयी थी।

पूँजी बाजार एवं मुद्रा बाजार के बीच में प्रमुख भिन्नता यह है कि मुद्रा बाजार एक अल्पावधि की वित्तीय व्यवस्था वाला बाजार है जबकि पूंजी बाजार में मध्यम तथा दीर्घकाल के कोषों का आदान प्रदान किया जाता है।

भारतीय पूँजी बाजारों को दो भागों में बांटा जाता है –

1. संगठित पूँजी बाजार,
2. असंगठित पूंजी बाजार

1. संगठित पूँजी बाजार (Organized capital market)

संगठित पूँजी बाजार से आशय ऐसे बाजार से है जोकि किसी न किसी प्रकार से नियंत्रित होता है। इसमें पूंजी की मांग करने वाले प्रमुख पक्ष संयुक्त पूँजी वाली कंपनियों एवं सरकारी संस्थाएं होती हैं।

संगठित पूंजी बाजार को भी दो भागों में बांटा गया है –

I. गिल्ट एज्ड बाजार (Gilt Edged Market)

गिल्ट एज्ड बाजार (Gilt Edged Market) में भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से केवल सरकारी व अर्ध सरकारी प्रतिभूतियों का क्रय विक्रय किया जाता है। इस बाजार को सबसे सुरक्षित बाजार माना जाता है (प्रतिभूतियों का मूल्य स्थिर रहता है)। इस बाजार में जोखिम कम होता है जिस कारण निवेशकों की पूंजी यहां सुरक्षित रहती है।

II. औद्योगिक प्रतिभूति बाजार (Industrial Security Market)

औद्योगिक प्रतिभूति बाजार (Industrial Security Market) में औद्योगिक कंपनियों की इक्विटियों और ऋण-पत्रों को बेचा और खरीदा जाता है। औद्योगिक प्रतिभूति बाजार में नए अथवा पहले से स्थापित औद्योगिक उपक्रमों के शेयरों (अंश पूँजी) की बिक्री (क्रय-विक्रय) की जाती है। इस बाजार में निजी प्रतिभूतियों को कंपनियों द्वारा बेचा जाता है। इनका पंजीकरण भारतीय कंपनी एक्ट 2013 (Indian Company Act 2013) के अंतर्गत होता है।

कंपनियां मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं –

1. Public Limited

      • कम से कम 7 अंशपूँजी धारक होते हैं।
      • 50% से अधिक हिस्सेदारी सरकार की है।

      2. Private Limited

          • 2 से 50 अंशधारक होते हैं।
          • 50% से अधिक हिस्सेदारी निजी कंपनी/कंपनियों की है।

          औद्योगिक प्रतिभूति बाजार को आगे दो भागों में बांटा गया है –

          i. प्राथमिक प्रतिभूति बाजार (Primary Security Market)

          प्राथमिक प्रतिभूति बाजार (Primary Security Market) में कंपनी सीधे जनता के बीच अपने अंश पूँजी(Share) जारी करती है। ये नये Share होते है और इनके जारी होने से पूंजी बाजार में नया निवेश आता है। इस प्रक्रिया में कोई भी दलाल(Broker) नहीं होता, बल्कि कंपनी सीधे निवेशकों को अंश पूँजी बेचती है।

          ii. द्वितीयक प्रतिभूति बाजार (Secondary Security Market)

          द्वितीयक प्रतिभूति बाजार (Secondary Security Market) में कंपनियों की अंश पूंजी को ब्रोकर के माध्यम से निवेशकों के बीच खरीदे व बेचे जाते हैं। द्वितीयक बाजार में पुरानी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री होती है। ये वे प्रतिभूतियां है जोकि प्राथमिक प्रतिभूति बाजार में पहले बिक चुकी होती हैं। अंश पूँजी (Share) की कीमत में उतार चढ़ाव चलता रहता है। इसी द्वितीयक बाजार को हम स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) कहते है।

          2. असंगठित पूंजी बाजार (Unorganized capital market)

          असंगठित पूंजी बाजार से आशय ऐसे बाजार से है जोकि किसी भी प्रकार से नियंत्रित नहीं होता है। ये बाजार पूर्णतः अनियंत्रित होता है। साहूकार, महाजन एवं अन्य अनियंत्रित वित्तीय सहायता समूह इसके उदाहरण हैं। आसान शब्दों में असंगठित पूंजी बाजार कार्यशील पूंजी के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराते हैं।

          Investment Tips: शेयर मार्केट से करोड़पति कैसे बनें? आपका भी है यही सवाल? ये 7 जवाब

          अमित कुमार दुबे

          पैसा कमाना हर किसी को अच्छा लगता है. कहा जाता है कि शेयर बाजार में बहुत पैसा है. कुछ लोगों को उदाहरण दिया जाता है कि इन्होंने महज 5000 रुपये से निवेश की शुरुआत की थी, और आज शेयर बाजार से करोड़ों रुपये बना रहे हैं. आखिर उनकी सफलता का राज क्या है, आज हम आपको बताएंगे? (Photo: Getty Images)

          How can I earn 1 crore easily

          दरअसल, आप भी कुछ आसान टिप्स को फॉलो कर शेयर बाजार से पैसे बना सकते हैं. शेयर बाजार में कुछ बातों का ध्यान रखकर आप लखपति से करोड़पति बन सकते हैं. लेकिन अक्सर लोग पैसे बनाने की होड़ में नियम और रिस्क को भूल जाते हैं, या फिर कहें जानबूझकर नजरअंदाज कर देते हैं. और फिर उनकी उनकी शिकायत होती है कि शेयर बाजार से बड़ा नुकसान हो गया. (Photo: Getty Images)

          Major Reasons Retail Investors Lose Money in the Stock

          यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि शेयर बाजार से 90 फीसदी से ज्यादा रिटेलर पैसा नहीं बना पाते हैं, हर रिटेल निवेशक को शेयर बाजार में कदम रखने से पहले इसे आंकड़े को ध्यान में रखना चाहिए. लेकिन एक इसमें एक अच्छी बात यह है कि 10 फीसदी रिटेल निवेशक पैसे बनाने में सफल रहते हैं. क्योंकि वे नियमों को फॉलो करते हैं. (Photo: Getty Images)

          शुरुआत कैसे करें:

          अब आइए आपको बताते हैं कि शेयर बाजार के आप कैसे करोड़पति बन सकते हैं.

          1. शुरुआत कैसे करें: शेयर बाजार में निवेश से पहले ये जानने की कोशिश करें कि शेयर बाजार क्या है? शेयर बाजार कैसे काम करता है? लोगों को शेयर बाजार से कैसे कमाई होती है? क्योंकि शेयर बाजार कोई पैसे बनाने की मशीन नहीं है. डिजिटल के इस दौर में आप घर बैठे ऑनलाइन इस बारे में जानकारी जुटा सकते हैं. इसके अलावा आप इस मामले में वित्तीय सलाहकार की मदद ले सकते हैं. जो आपको शुरुआत में सही दिशा बताएंगे.

          छोटी रकम से करें निवेश की शुरुआत


          2. छोटी रकम से करें निवेश की शुरुआत: ये जरूरी नहीं है कि शेयर बाजार में निवेश के लिए बड़ी रकम होनी चाहिए. अधिकतर लोग यही गलती करते हैं. अपनी पूरी जमापूंजी शेयर बाजार में लगा देते हैं. फिर बाजार में उतार-चढ़ाव को झेल नहीं पाते हैं. आप छोटी रकम यानी महज 5 रुपये से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं. (Photo: Getty Images)

          टॉप कंपनियों को चुनें

          3. टॉप कंपनियों को चुनें: शुरुआत में बहुत ज्यादा रिटर्न पर फोकस करने से बचें. क्योंकि बहुत ज्यादा रिटर्न के चक्कर में लोग उन कंपनियों स्टॉक्स में पैसे लगा देते हैं, जो फंडामेंटली मजबूत नहीं होते हैं, और फिर फंस जाते हैं. इसलिए निवेश की शुरुआत अक्सर लार्ज कैप कंपनियों से करें. जो फंडामेंटली मजबूत हो. जब आपको कुछ साल का अनुभव हो जाएगा तो फिर थोड़ा रिस्क ले सकते हैं.

           निवेशित रहने की जरूरत

          4. निवेशित रहने की जरूरत: जब आप छोटी रकम से निवेश की शुरुआत करेंगे, तो फिर हर महीने निवेश को बढ़ाते रहें. अपने पोर्टफोलियो को संतुलित बनाकर रखें. जब आप लगातार कुछ साल तक बाजार में निवेशित रहेंगे तो फिर आप लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं. अक्सर बाजार में लंबे समय के निवेशित रहने वालों का फायदा होता है. (Photo: Getty Images)

          पैनी स्टॉक्स से रहें दूर

          5. पैनी स्टॉक्स से रहें दूर: रिटेल निवेशक अक्सर सस्ते स्टॉक्स पर फोकस करते हैं. 10-15 रुपये वाले स्टॉक्स को अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर लेते हैं और फिर गिरावट में घबरा जाते हैं. उन्हें लगता है कि सस्ते शेयर में कम निवेश कर ज्यादा कमाया जा सकता है. लेकिन ये सोच गलत है. स्टॉक्स का चयन हमेशा कंपनी की ग्रोथ को देखकर करें. उसी कंपनी में निवेश करें, जिसका बिजनेस अच्छा हो और उस बिजनेस को चलाने वाला मैनेजमेंट अच्छा हो.

           गिरावट में घबराएं नहीं

          6. गिरावट में घबराएं नहीं: शेयर बाजार में जब भी गिरावट आए, तो अपने निवेश को बढ़ाने बढ़ाएं. अक्सर रिटेल निवेशक को जब तक कमाई होती है, तब तक वो निवेश में बने रहते हैं. लेकिन जैसे से बाजार में गिरावट का दौर चलता है, रिटेल निवेशक घबराने लगते हैं, और फिर बड़े नुकसान के डर से शेयर सस्ते में बेच देते हैं. जबकि बड़े निवेशकर खरीदारी के लिए गिरावट का इंतजार करते हैं. (Photo: Getty Images)

           कमाई का कुछ हिस्सा करें सुरक्षित निवेश


          7. कमाई का कुछ हिस्सा करें सुरक्षित निवेश: शेयर बाजार से होने वाली कमाई के कुछ हिस्से को सुरक्षित निवेश के तौर पर दूसरे जगह पर भी लगाएं. इसके अलावा अपने मुनाफे को बीच-बीच में कैश करते हैं. सबसे अहम और हर रिटेल निवेशक के जरूरी बात यह है कि वे बिना वित्तीय बाज़ार क्या हैं जानकारी शेयर बाजार से दूर रहें, और निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें. देश के बड़े निवेशकों को फॉलो करें, उनकी बातों को गंभीरता से लें. (Photo: Getty Images)

          New Year New Idea: नए साल से आप लें केवल ये एक RISK, 97% आबादी अब भी इस काम से अनजान!

          अगर अभी तक आप बचत को फिक्स्ड डिपॉजिट करते आए हैं तो नए साल से इसे रोक दें. 30 हजार महीने की सैलरी में से 20 फीसदी राशि जरूर बचाएं, यानी हर महीने 6000 रुपये. इसमें 4 हजार रुपये हर म्यूचुअल फंड में एसआईपी करें. बाकी बचे 2000 रुपये को सीधे शेयर बाजार में लगाएं.

          नए साल से नया तरीका

          अमित कुमार दुबे

          • नई दिल्ली,
          • 19 दिसंबर 2022,
          • (अपडेटेड 19 दिसंबर 2022, 2:11 PM IST)

          अभी तक कोई जमापूंजी नहीं है, फिर क्या गारंटी है कि नए साल यानी 2023 में आपकी आर्थिक सेहत सुधर जाएगी? दरअसल मौजूदा समय में दुनियाभर में महंगाई (Inflation) चरम पर है, महंगाई के हिसाब से आमदनी बढ़ नहीं रही है. फिर तो अगले साल भी आर्थिक तंगी बनी रहेगी.

          ऐसे में अगर आप रिस्क (Risk) लेने के लिए तैयार हैं तो फिर नए साल में कुछ बदलाव की उम्मीद कर सकते हैं. अभी भी हमारे में अधिकतर लोग लंबी अवधि के लिए बैंक (Bank) और पोस्ट ऑफिस (Post Office) में फिक्स्ड (Fixed Deposit) डिपॉजिट को सबसे बेहतरीन विकल्प मानते हैं. जबकि आंकड़ों पर गौर करें तो फिलहाल अधिकतर बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट पर 7 फीसदी सालाना के हिसाब से ब्याज मिल रहे हैं. जो महंगाई दर के मुकाबले कम है, क्योंकि देश में महंगाई दर भी 7 फीसदी के आसपास है.

          अब भी फिक्स्ड डिपॉजिट पर सबसे ज्यादा फोकस

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          फिलहाल बैंक से लेकर पोस्ट ऑफिस में पैसे दोगुने होने में करीब 10 साल का वक्त लग जाता है, सबसे बुरा हाल तो सेविंग अकाउंट (Saving Account) का है. जिसपर केवल 2 से 3 फीसदी सालाना रिटर्न मिलता है. अगर आप बचत को सेविंग अकाउंट या फिर FD कर देते हैं तो फिर इससे बहुत ज्यादा रिटर्न की उम्मीद नहीं कर सकते.

          खासकर मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास फैमिली के लिए एफडी भविष्य के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतरीन विकल्प नहीं हो सकते. तमाम विकल्पों में एक विकल्प सुरक्षित निवेश के तौर पर आप FD में निवेश कर सकते हैं. लेकिन इससे फ्यूचर प्लान (Future Plan) संभव नहीं है.

          500 रुपये से करें निवेश की शुरुआत

          आपकी जितनी भी आमदनी है, थोड़ा रिस्क लेकर उसी में से आप बेहतर रिटर्न के लिए नए साल में कदम उठा सकते हैं. इसके लिए आपको शेयर बाजार (Share Market) और म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की तरह रुख करना होगा. जहां आप छोटे-छोटे निवेश से मोटा पैसा बना सकते हैं. शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए डिमैट अकाउंट (Demat Account) की जरूरत होगी. जिसके जरिये आप केवल 500 रुपये से म्यूचुअल फंड में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं.

          इसके अलावा थोड़ी जानकारी जुटाकर या वित्तीय सलाहकार की मदद लेकर लंबी अवधि के लिए सीधे शेयर मार्केट (Stock Market) में निवेश कर सकते हैं. फिलहाल भारत में केवल 3 फीसदी लोग शेयर बाजार में निवेश करते हैं, जबकि अमेरिका में 55 फीसदी लोग शेयर बाजार से जुड़े हैं. इस हिसाब से भारत में 97 फीसदी लोग अभी भी शेयर बाजार से दूरी बनाए हुए हैं.

          10 साल में बदल जाएगी आर्थिक सेहत

          अब आइए समझते हैं कि कैसे आप नए साल में थोड़ा रिस्क लेकर अपनी आर्थिक स्थिति को बदल सकते हैं. उदाहरण के लिए अगर आपकी सैलरी फिलहाल 30 हजार रुपये महीने है. आप नए साल में 20 फीसदी राशि को बचाना शुरू कर दें. अगर आप पहले से बचा रहे हैं तो वित्तीय बाज़ार क्या हैं फिर उस राशि को निवेश के लिए केवल प्लेटफॉर्म बदल दें, यानी अभी तक अगर आप उन पैसों को सेविंग अकाउंट या फिक्स्ड डिपॉजिट करते आए हैं तो नए साल से इसे रोक दें. 30 हजार महीने की सैलरी में में 20 फीसदी राशि जरूर बचाएं, यानी हर महीने 6000 रुपये. इसमें 4 हजार रुपये हर माह म्यूचुअल फंड में एसआईपी कर दें. बाकी बचे 2000 रुपये को सीधे शेयर बाजार में लगाएं.

          किस शेयर में पैसे लगाएं? इसका सीधा फॉर्मूला है कि अगर आपको शेयर बाजार की जानकारी नहीं है तो फिर उन कंपनियों के शेयरों को चुनें, जिनके प्रोडक्ट्स आप घर में इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा शेयर चुनते वक्त एक बात का जरूर ध्यान रखें, कंपनी मुनाफे में हो और पिछले कुछ सालों से लगातार ग्रोथ दर्ज कर रही हो, लॉस मेकिंग कंपनी पर बिल्कुल दांव न लगाएं.

          रिस्क लेकर जुटा सकते हैं बड़ा फंड

          जब आप हर महीने 4 हजार रुपये SIP करेंगे तो सालाना आपका निवेश करीब 50 हजार रुपये का हो जाएगा. आप सालाना कम से कम 12 फीसदी रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं. इसी तरह से सैलरी बढ़ने के साथ निवेश को भी बढ़ाते रहें. कम से कम 10 साल निवेश तक जारी रखें. फिर आपके पास एक बड़ा फंड हो जाएगा. हालांकि म्यूचुअल फंड और इक्विटी मार्केट में निवेश पर जोखिम भी रहता है, यानी निवेश की राशि भी घट सकती है. लेकिन रिस्क लेकर निवेश करने पर सफलता की गारंटी तो नहीं है, लेकिन एक उम्मीद जरूर कर सकते हैं.

          अगर दांव सही बैठा तो फिर बैंक एफडी और पोस्ट ऑफिस के मुकाबले बेहतरीन रिटर्न आपके पोर्टफोलियो में होगा. अगर आप नए निवेशक हैं तो म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश के लिए एक्सपर्ट्स की मदद ले सकते हैं, जो आपसे मामूली फीस लेकर सही निवेश के तरीके बताएंगे.

          (नोट: शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें)

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